प्रेस विज्ञप्ति
सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दो दिवसीय ‘टैकलिंग रिवर्स थ्रू माइंडपावर’ कार्यशाला का सफल समापन
सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सेमिनार हॉल में विद्यार्थियों के मानसिक एवं सर्वांगीण विकास हेतु आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “टैकलिंग रिवर्स थ्रू माइंडपावर” (Tackling Reverses Through Mind Power) का समापन हुआ। दिनांक 11 एवं 12 फरवरी 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. केशवानंद दास (MBBS, BJMC पुणे) एवं पुरुषोत्तम केशव दास (B.Tech, NIT जमशेदपुर) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य वक्ताओं एवं संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापकों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं ईश वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर असैनिक अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कुमार, विद्युत अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष डॉ. इरशाद आलम, यांत्रिकी अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार, कंप्यूटर साइंस अभियंत्रण के विभागाध्यक्ष डॉ. सादिक नईम सहित वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अकबर अली, डॉ. अरुण कुमार एवं श्री सुशील कुमार तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस: स्वास्थ्य एवं समय प्रबंधन का वैज्ञानिक विश्लेषण
कार्यशाला के प्रथम चरण में वक्ताओं ने ‘जैविक घड़ी’ के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रात्रि 9 बजे से 12 बजे तक की नींद की गुणवत्ता सर्वाधिक होती है, जहाँ प्रत्येक घंटा शरीर के लिए दो घंटे के विश्राम के समान प्रभावी है। इसके साथ ही ‘आहार विज्ञान’ पर जानकारी देते हुए बताया गया कि फलों के सेवन और अन्न ग्रहण करने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतराल अनिवार्य है। सत्र के दौरान विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण की तकनीक सिखाई गई, जिसमें प्राथमिकताओं का वर्गीकरण और ‘टाइमलाइन’ के महत्व पर बल दिया गया। साथ ही, समाज में प्रभावी संवाद के लिए ‘मृदु, तर्कपूर्ण एवं अहिंसक वाणी’ तथा ‘समानुभूतिपूर्ण श्रवण’ के कौशल पर अभ्यास कराया गया।
द्वितीय दिवस: आदतों का रूपांतरण और सफलता के षट-नियम:-
दूसरे दिन ‘आदतों की शक्ति’ विषय पर गहन चिंतन हुआ। विशेषज्ञों ने समझाया कि कैसे छोटी-छोटी दैनिक आदतें भविष्य का निर्माण करती हैं। सफलता के छह मूल मंत्र साझा किए गए जिनमें उत्साह, दृढ़ निश्चय, धैर्य, उत्तम आदतों का पालन, कुसंगति से बचाव और महान विभूतियों के जीवन वृतांत का पठन शामिल रहा। विद्यार्थियों को टीम भावना के साथ कार्य करने की कला भी सिखाई गई।
सफल आयोजन एवं सहभागिता:-
कार्यक्रम के समापन पर यांत्रिकी अभियंत्रण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के चरित्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होती हैं। इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्यों एवं कर्मियों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाया। सेमिनार हॉल में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ सत्र के दौरान अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
