💐 यह सच और विडम्बना है कि हमारे प्रतिनधि करोड़ों में बिकते हैं , करोड़ों की पूंजी लगाकर राजनीति में प्रवेश करते है और हमें जी भरकर लूटते हैं ठसक से !! परन्तु आम जनता 5 किलो अनाज , कुछ ही पैसे की लालच में व झूठे वादों में ही बिकने को आतुर होते है , संतुष्ट हो जाते हैं और सत्ता की चाभी उन्हें सौंप देते हैं !!

💐अतः जनता को ही सुधरने की प्राथमिक जरूरत है ! सजग जनता के बिना लोकतन्त्र सम्भव नहीं है ! वे समाचारों की असलियत को जान ही नहीं पाते हैं !! भाई-बहिन , ऐसी बौद्धिक दिवालियापन अशिक्षा और अर्थाभाव से उत्पन्न होते हैं !! इसीलिए इन खामियों को दूर करने के लिए समूलतः व्यवस्था परिवर्तित करने ही होंगें ! अन्य कोई उपाय नहीं है !!

💐हमें अवांछित तत्त्वों को कुर्सी हथियाने से रोकना होगा जो वर्तमान विदेशी सर्वनाशी सिस्टम के द्वारा प्रवेश कर जाते हैं !! नया ढांचा पूर्ण परिमार्जित व पारदर्शी हों !! राजनीति कोई सेवा नहीं रहा वल्कि एक बहुत ही महंगा व्यवसाय बना हुआ है !! हमें प्रतिनिधित्व के लिये उनमें पात्रता विकसित करनी होगी !!

💐इसमें कुछ भी तो सही नहीं है !! क्या से क्या हो गया देखते देखते ! लेकिन हमसब हैं कि अंधाधुंध बहते ही जा रहे हैं ! हमारे प्रतिनिधियों को हांकने वाले या खरीदने वाले कितने शातिर होंगें यह समझा जा सकता है ! देश कन्गाल हो चुका है और समाज में विभेद पैदा कर लड़वाया जाता है !! अनगिन सवाल मुंह बाये खड़े हैं जो हमें निगलने में समर्थ हैं !!

💐 निश्चय ही आपकी सहमति से ” ऐतिहासिक वैचारिक महाक्रांति ” का ((( स्वदेशी शासन-प्रणाली ))) पूर्णतया कायाकल्प कर शांति तथा उन्नति के द्वार खोल सकता है !! वैश्विक पटल पर अपनी खोयी हुई मान शान एवं स्वाभिमान को पुनः स्थापित कर सकता है !! 79 79 81 83 85 ,, भारत की एकमात्र अनोखा आदर्श मानवतावादी ज़मीनी चिन्तन धारा !! जयजय सपनों का भारत !! 💐💐💐💐💐💐💐💐

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