माता सीता जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन किए देश के साहित्यकार।जगत जननी माता सीता जन्मभूमि के पंच तीर्थ स्थल दर्शन करने के लिए देश के साहित्यकार हिंदी के विद्वान कवि लेखक पहुंचे।सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा के निदेशक आग्नेय कुमार के नेतृत्व में सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया।साथ ही सीता जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन पुस्तिका प्रदान की गई।जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम का दर्शन कर प्रो. विनय कुमार सिंह पूर्व कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने कहा यह अद्भुत स्थान है जहां जगत जननी सीता धरती से प्रकट हुई है।भव्य सीता मंदिर के निर्माण से देश विदेश के पर्यटकों का आगमन होगा।सनातन आस्था विश्वास को मजबूती मिलेगी एवं स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।
सीता डोली स्थल पंथ पाकर धाम का दर्शन कर प्रो. रामेश्वर मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल ने कहा दो अवतार श्री राम और श्री परशुराम जी एक स्थान एक समय एक काल में मिले यह अद्भुत अलौकिक स्थल है।प्रकृति की सुंदरता मनोरम है।एक दूजे की शाखा से लिपटा पाकर पेड़ अपनी सुंदरता और प्राचीनता के कारण आकर्षित करता है।सीता डोली स्थल पर पिंड दर्शन हमारी प्राचीन पूजा पद्धति भक्ति भाव विश्वास को मजबूती प्रदान करता है।यह तप भूमि है जहां से परशुराम तपस्या हेतु हिमालय की ओर प्रस्थान करते है और श्री राम जगत जननी सीता एवं बाराती संग अवध की ओर जाते है।
श्री रजत द्वार जानकी मंदिर सीतामढ़ी धाम का दर्शन कर सभी आगंतुकों आत्मविभोर हुए।प्रो. शकुन्तला मिश्र, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, विश्व भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल एवं प्रो.‌रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव उपाख्या ‘परिचर दास’, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, नव‌नालंदा महाविहार हम विश्वविद्यालय, राजगीर ने कहा माता सीता कण कण में विद्धमान है।जगत जननी होने के नाते सर्वत्र व्याप्त है।मिथिला की पावन भूमि पर पुण्यारण्य पुण्यभूमि क्षेत्र में उनका प्रकट होना ही परम सौभाग्य रहा है।आस्था विश्वास भक्ति भाव यह सब श्रद्धा से संचालित होता है।प्राचीन मंदिर जो 1599 से संचालित है इसे देखकर उर्विजा कुंड दर्शन कर एवं सीता जन्मभूमि प्रतीक झांकी दर्शन कर बहुत आनंदित हुए।
डॉ. श्याम नन्दन, सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी एवं रविशंकर वर्मा, विभाग संपर्क प्रमुख, चंपारण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक विद्वानों ने सीता जन्मभूमि का दर्शन किए।सभी साहित्यकारों ने कहा इस यात्रा की पुस्तक प्रकाशित की जाएगी।वंदना‌ श्रीवास्तव, प्रख्यात कलाकार, भोजपुरी आर्टस,डॉ. संगीता सिंह, वाराणसी,पवन कुमार, शोधार्थी, हिंदी विभाग ,आशुतोष कुमार, शोधार्थी, हिंदी‌ विभाग,महेश कुमार, शोधार्थी, हिंदी विभाग
के अलावे छात्र एवं छात्राओं ने भी सीता जन्मभूमि पंच तीर्थ दर्शन किए।छात्र अमनदीप गुप्ता,सलोनी कुमारी, खुशबू कुमारी,रौनक कुमार सिंह काफी उत्साहित होकर सीता जन्मभूमि के सांस्कृतिक विरासत का दर्शन किए।
साहित्यिक विद्वानों ने सीता रसोई में प्रसाद ग्रहण किए।साहित्यिक विद्वानों ने सामूहिक रूप से विभाग प्रचारक मृत्युंजय भारत एवं सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा निदेशक आग्नेय कुमार को अंगवस्त्र से सम्मानित किया।

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