मधुबनी, बिहार। मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में स्थानांतरित कर्मचारियों को ट्रांसफर की तिथि से एक सप्ताह के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर अनिवार्य रूप से योगदान देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सभी विभागाध्यक्षों और नियंत्रण पदाधिकारियों को स्थानांतरण प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने तथा निर्धारित प्रपत्र में प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह व्यवस्था सरकारी कार्यालयों में कार्यों के सुचारु संचालन, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
जिलाधिकारी ने आदेश में कहा है कि सभी संबंधित कार्यालयों के प्रधान एवं नियंत्रण पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि स्थानांतरित कर्मचारियों को नियमानुसार समय पर विरमित (रिलीव) किया जाए, ताकि वे निर्धारित अवधि के भीतर अपने नए कार्यस्थल पर योगदान दे सकें।
सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं समय पर पूरी करने के निर्देश
निर्देशों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को विरमित करने से पहले उससे जुड़ी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करना अनिवार्य होगा। इसमें सेवा पुस्तिका (Service Book) का हस्तांतरण, प्रभार सौंपने की प्रक्रिया, डोंगल डी-एक्टिवेशन और एक्टिवेशन, रिकॉर्ड बही का अद्यतन तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि इन सभी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा कर कर्मचारियों को बिना अनावश्यक विलंब के नए पदस्थापन स्थल के लिए मुक्त किया जाए।
विभागाध्यक्षों से मांगी गई दैनिक रिपोर्ट
जिला प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया की प्रगति से संबंधित दैनिक प्रतिवेदन निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं।
इस प्रतिवेदन में संबंधित कार्यालय का नाम, स्थानांतरित कर्मचारियों की कुल संख्या, विरमित किए गए कर्मचारियों की संख्या तथा अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इसका उद्देश्य स्थानांतरण प्रक्रिया की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
लापरवाही या देरी पर सख्त रुख
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें और नियमित रूप से प्रतिवेदन जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं।
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकारी कार्यालयों में कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी, प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी तथा विभिन्न विभागों में कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होगी।
