मधुबनी में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का सराहनीय उदाहरण सामने आया है। ऑफिसर्स कॉलोनी स्थित सरकारी आवास के समीप भटककर पहुंचे एक कछुए का वरीय उपसमाहर्ता की तत्परता से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। बाद में वन विभाग ने उसे उसके प्राकृतिक आवास जीवछ नदी में छोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, देर रात वरीय उपसमाहर्ता के सरकारी आवास के पास एक कछुआ विचरण करता हुआ दिखाई दिया। आबादी वाले क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को देखते हुए अधिकारी ने तत्काल उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कछुए को सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित रखा गया, ताकि उसे किसी प्रकार की चोट या नुकसान न पहुंचे।

इसके बाद वरीय उपसमाहर्ता ने तत्काल वन परिसर पदाधिकारी अनूप कुमार से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और वन्यजीव के सुरक्षित संरक्षण की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और वन परिसर पदाधिकारी रात में ही ऑफिसर्स कॉलोनी पहुंचकर कछुए को अपने संरक्षण में ले गए।

अगले दिन वन विभाग ने निर्धारित वन्यजीव संरक्षण मानकों का पालन करते हुए कछुए को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की कार्रवाई की। इस दौरान डीपीओ नमामि गंगे आनंद अंकित की मौजूदगी में जीवछ नदी में कछुए का सुरक्षित पुनर्स्थापन किया गया। नदी में छोड़े जाने के बाद कछुआ स्वाभाविक रूप से अपने प्राकृतिक वातावरण की ओर बढ़ गया।

अधिकारियों ने बताया कि कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को कायम रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि कोई कछुआ अपने प्राकृतिक आवास से भटककर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाता है, तो सड़क दुर्घटना, आवारा पशुओं या अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण उसके जीवन पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

वरीय उपसमाहर्ता की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय संबंधित विभाग को तुरंत सूचना देनी चाहिए।

वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव रिहायशी इलाके में दिखाई दे तो उसे स्वयं पकड़ने या कहीं और ले जाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर वन्यजीव को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ सके।

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