बनारस की माटी से ‘मीडिया सरकार’ तक,पत्रकारिता के महानायक एके बिंदुसार के संघर्ष और विजय की गाथा:
- कृष्ण माधव मिश्रा
( केंद्रीय अध्यक्ष केंद्रीय सलाहकार परिषद, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) की कलम से ——————————
भारतीय पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता के आकाश पर एके बिंदुसार एक ऐसे चमकते सितारे हैं, जिन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया।
वाराणसी के चिरईगाँव की माटी में रचे-बसे और मिर्ज़ापुर की वादियों में पले-बढ़े एके बिंदुसार आज देश के लाखों पत्रकारों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ बन चुके हैं।
ननिहाल की शिक्षा और संस्कारों की नींव,
एके बिंदुसार का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा मिर्जापुर के चुनार स्थित इमलिया चट्टी में उनके ननिहाल में हुई। ननिहाल की उस पावन भूमि ने उन्हें वह जुझारूपन और संस्कार दिए, जिसने आगे चलकर उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का साहस प्रदान किया। वाराणसी का मूल निवासी होने के नाते उनमें जो सांस्कृतिक गहराई है, वही उनकी वाणी और नेतृत्व में स्पष्ट झलकती है।
वाराणसी से दिल्ली तक: ‘मीडिया सरकार’ का उदय
2014 में पत्रकारिता की शुरुआत कर ‘आई क्रांति’ के जरिए अलख जगाने वाले बिंदुसार को आज देश ‘मीडिया सरकार’ के नाम से जानता है।
यह उपाधि उन्हें महाराष्ट्र के पत्रकारों ने उनके निस्वार्थ समर्पण और पत्रकारों के प्रति अटूट सुरक्षा भाव को देखकर दी थी। आज यह नाम उनकी पहचान बन चुका है।
वर्तमान में, वे देश की राजधानी दिल्ली (महावीर एनक्लेव, बंगाली कॉलोनी) से अपने यूनियन का संचालन करते हैं, लेकिन उनका दिल आज भी अपनी जड़ों में बसता है।
मिर्जापुर: क्रांति का नया केंद्र
अक्सर लोग सफलता मिलने के बाद महानगरों के हो जाते हैं, लेकिन एके बिंदुसार ने एक अलग राह चुनी। उन्होंने मिर्जापुर को ही अपना मुख्य केंद्र बनाया है। यहीं से वे पूरे देश के भ्रमण पर निकलते हैं और 28 राज्यों में फैले अपने संगठन की कमान संभालते हैं। उनका निरंतर भ्रमण इस बात का प्रमाण है कि वे केवल पद पर बैठने वाले नेता नहीं, बल्कि धरातल पर लड़ने वाले सिपाही हैं।
मिशन: सम्मान, सुरक्षा और अधिकार,
26 जनवरी 2017 को भारतीय मीडिया फाउंडेशन की स्थापना के बाद से बिंदुसार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका मिशन स्पष्ट है:
पत्रकार सुरक्षा: पत्रकारों पर होने वाले हमलों के खिलाफ मुखर आवाज।
सामाजिक न्याय: सामाजिक कार्यकर्ताओं को समाज में उचित स्थान दिलाना।
संगठनात्मक शक्ति: बिखरे हुए पत्रकारों को एक सूत्र में पिरोकर एक ‘मीडिया परिवार’ बनाना।
नई चेतना का संचार,
एके बिंदुसार का जीवन संदेश देता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक छोटे से गाँव का युवक भी देश की राजधानी में बैठकर पूरे राष्ट्र की चेतना को झकझोर सकता है। 2023 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल स्वर्णिम रहा, और आज भी उनका मार्गदर्शन देश के कोने-कोने में पत्रकारों को एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
संदेश: खबरें लिखना पत्रकारिता का एक हिस्सा है, लेकिन उन खबरनवीस के सम्मान की रक्षा करना ‘ईश्वर की सेवा’ है। एके बिंदुसार इसी सेवा के पर्याय हैं।
