जनपद महेन्द्रगढ़ के ताज गांव स्याणा की तमन्नाएं
1. लोक आशु महाकवि पं सुखीराम गुणी: उत्तर भारत के लोक आशु महाकवि पं सुखीराम गुणी जी जिनकी रचनाएं सार्वभौमिक हैं। गुणी जी के नाम से हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला द्वारा बड़ा सम्मान चालू किया जाए तथा केन्द्रीय साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा भी गुणी जी के नाम से बड़ा सम्मान चालू किया जाए। एक विश्वविद्यालय में गुणी जी के नाम से शोध पीठ स्थापित किया जाए।कम से कम दो दर्जन विश्वविद्यालयों में गुणी जी के साहित्य पर शोधकार्य किया जाए। गुणी जी के नाम से नारनौल से चरखी दादरी तक के मार्ग का नामकरण किया जाए। गुणी जी के नाम से रेवाड़ी/गुरूग्राम में उद्यान बनाया जाए। गुणी जी की प्राचीन पांडुलिपियों को सार्वजनिक किया जाए ताकि गुणी जी की छाप काट कर दूसरे कवि की छाप लगाकर गाने व पुस्तक प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
2. स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर:- गांव के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी नसीबपुर युद्ध के योद्धा तुलाराम पुत्र रामबक्स जी के नाम पर एक मार्ग का नामकरण किया जाए। गांव के द्वितीय स्वतंत्रता सेनानी गुगन सिंह पुत्र कन्हीराम जी के नाम से एक मार्ग का नामकरण किया जाए। गांव तृतीय स्वतंत्रता सेनानी गुगन सिंह पुत्र जीवाराम जी के नाम से एक मार्ग का नामकरण किया जाए।
3. शहीदों के नाम पर:- प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद खेमचंद पुत्र पूर्ण जी के नाम से एक मार्ग का नामकरण किया जाए। रेजांगला के उन 114 वीर अहीर शहीद योद्धाओं में गांव स्याणा के नायक भूप सिंह पुत्र पूर्ण जी के नाम से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्याणा का नामकरण किया जाए।शहीद कप्तान आकाश यादव पुत्र अध्यापक सुरेश कुमार जी के नाम से महेन्द्रगढ़ में एक मार्ग का नामकरण करवाया जाए।शहीद मांगेराम पुत्र सैनिक श्रीराम जी के नाम से एक मार्ग का नामकरण किया जाए। रेजांगला के उन सभी वीर अहीर योद्धाओं की याद में गांव में एक स्वागत द्वार का निर्माण किया जाए।
4. कलाकारों के नाम पर: गांव के सुप्रसिद्ध नृतक जिनसे लखमीचन्द जी ने भी नृत्य सीखा था गांव के सहीराम पुत्र मामचंद जी के नाम से भी एक मार्ग का नामकरण किया जाए। मूर्तिकार सैनिक मनोहर लाल पुत्र बनवारी लाल जी के नाम से एक मार्ग का नामकरण किया जाए।
5. पर्यटन एवं पुरातात्विक स्थल:- गांव स्याणा के ढाब आश्रम स्थल पर प्राचीन काल में ऋषि धोम्य का आश्रम था और आरूणि का नाम ऋषि उद्दालक इसी स्थल पर पड़ा और यही पर तपस्या की थी तथा पांडवों ने अपने बनवास काल का यहीं पर समय बिताया था और एक ढाब सरोवर व बावड़ी का निर्माण किया था पांडवों से उनका अज्ञात वास किस स्थान पर सुरक्षित रहेगा इसकी मंत्रणा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण व महर्षि वेदव्यास जी यहां आए थे। श्री कृष्ण जी के चरण यहां पड़े थे इसीलिए यहां कदम्ब के प्राचीन वृक्ष मौजूद हैं। गांव स्याणा व गांव बाघोत के बीच से प्राचीन काल में पवित्र सरस्वती नदी बहती थी इसलिए यह अहम जरूरी हो जाता है कि ढाब आश्रम स्थल को धार्मिक पर्यटन स्थल बनवाया जाए।
6. गौरव पट्ट:- गांव के गौरव पट्ट पर जो शेष रह गई सभी विभूतियों तथा दानवीरों, समाजसेवियों के नाम लिखे जाए।
7. प्राचीन वृक्षों की पेंशन:- गांव स्याणा में पंचायत भूमि पर महेन्द्रगढ़ जनपद में सबसे ज्यादा प्राचीन वृक्ष हैं जिनकी पेंशन बनवाई जाए।
8. खेल मैदान:- गांव के कई खिलाड़ी अंतराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक व रजत पदक विजेता रहे हैं तो गांव के अधिक से अधिक खिलाड़ी पैदा करने के लिए दोपाला सरोवर के पास खेल मैदान बनाया जाए।
9. पशु हस्पताल:- पशु चिकित्सक वाले इस बड़े हस्पताल की चारदीवारी का निर्माण किया जाए।
10. विलायती कीकर व कांग्रेस घास:- गांव की बणी में एक से बढ़कर एक दुर्लभ जड़ी-बूटियां पनपती थी लेकिन पिछले कुछ समय से विलायती कीकर व कांग्रेस घास ने अपना एकछत्र राज स्थापित करने के पश्चात सभी लघु वृक्ष/वनस्पतियों/जड़ी- बूटियों का खात्मा होता जा रहा है इसलिए विलायती कीकरों एवं कांग्रेस घास की बलि चढ़ाने से यदि अन्य महत्वपूर्ण वनस्पतियों को जीवनदान मिलता है तो बलि चढ़ाने में कोई हर्ज नहीं है।
*11. पांडवों द्वारा निर्मित ढाब आश्रम स्थल पर बहुत गहरी मिट्टी के नीचे दबी हुई बावड़ी की खोज करवाई जाए ताकि ढाब आश्रम स्थल का पुरातात्विक महत्व के स्थलों में विश्व पटल पर नाम आने से गांव का गौरव बढ़े।
*नोट:-* हमें सौभाग्य है कि हमारा गांव श्रेष्ठ संस्कारों का एक गांव है।मेरे विचारों से कौन- कौन सहमत है और इसके अलावा और भी कई नये विचार सामने आ सकते हैं। सभी के विचारों का स्वागत है। अपनी -अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।

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