एपस्टीन फाइल में एक रुक्का ऐसा भी है जिसे पढ़कर समूचे हिंदुस्थान का रक्त उबाल मारना चाहिए किंतु ना जाने कोई भी इस रुक्के की बात नहीं करता !

इन कुख्यात फाइल में बरस २०१५ की एक ईमेल का जिक्र है जिसमें एपस्टीन ने नॉर्वे के एक राजनयिक को ईमेल भेजा – संदर्भ भारत था। राजनयिक ने उत्तर में लिखा-

यदि तुम्हें सांप और भारतीय एक साथ दिखें तो सबसे पहले भारतीय को मारो।

इस ईमेल, फाइल के इस रुक्के पे हर भारतीय को ऐतराज होना चाहिए। माँग करनी चाहिए कि सरकार नॉर्वे दूतावास से राजदूत तलब करें और स्पष्टीकरण मांगे। किंतु सत्ताधीश दल क्या और विपक्ष क्या- दोनों ही इस ईमेल पे ऐतराज़ तो छोड़िये, बात तक नहीं कर रहे।

और वे करें भी क्यों? आख़िर देश के कोने कोने , यूनिवर्सिटी आदि में ये कहावतें जो चलती है-

चुनांचे गलती न एपस्टीन की थी, न उस नॉर्वेजियन राजनयिक की। गलती तो हमारी है—जो सदियों से अपने ही समाज के अलग अलग तबकों के लिए साँप से बदतर उपमाएँ गढ़ते आए, उन्हें दोहराते आए और तालियाँ बजाते आए।

जब हम ख़ुद ही तय कर चुके हों कि कौन पहले मारा जाएगा, तो विदेशियों से राष्ट्रसम्मान की उम्मीद करना भी बेमानी है।

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