सीतामढ़ी। एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर सीतामढ़ी जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका तथा शिक्षा विभाग के प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों/कर्मियों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में एनीमिया की स्थिति, उसके कारणों और नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि NFHS-5 के अनुसार बिहार में एनीमिया का प्रसार काफी अधिक है। 5 वर्ष तक के बच्चों में 69.4 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं में 63.1 प्रतिशत, 15-49 वर्ष की महिलाओं में 63.5 प्रतिशत तथा 15-19 वर्ष के किशोर-किशोरियों में 65.7 प्रतिशत एनीमिया से प्रभावित हैं, जो चिंता का विषय है।
एनीमिया नियंत्रण के लिए चार प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस और पंचायती राज संस्थाओं के समन्वय से सभी आयु वर्ग के लोगों को IFA सप्लीमेंट्स का सेवन सुनिश्चित करना, एनीमिया की नियमित जांच और उपचार, विभिन्न मंचों पर इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा एनीमिया के लक्षणों की पहचान कर उसका समुचित प्रबंधन करना शामिल है।
इसके साथ ही कार्यशाला में सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के विषय में भी प्रतिभागियों को जागरूक किया गया तथा बताया गया कि दवा सेवन से वंचित रह गए लोगों की पहचान कर उन्हें दवा खिलाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि कार्यक्रम का शत-प्रतिशत लाभ लोगों तक पहुंच सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन सीतामढ़ी डॉ. अखिलेश कुमार ने की। प्रशिक्षणकर्ता के रूप में पीरामल फाउंडेशन से प्रभाकर कुमार और यूनिसेफ से अभिषेक कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी संतोष कुमार, अस्पताल प्रबंधक विजय झा, संजय कुमार, पीरामल फाउंडेशन से रोहित कुमार, दुर्गा प्रसाद तथा जिला स्वास्थ्य समिति से मारुति नंदन झा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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