आदित्यनाथ का पाखंड और शंकर द्रोह हिंदू धर्म का द्रोह है –
शंकराचार्य जी के समक्ष क्या स्थान है गोरक्षपीठ के महंत का उसे समझ लेना आवश्यक है ?
दक्षिण के पूज्य शंकराचार्य भारतीतीर्थ महास्वामी एवं उनके उत्तराधिकारी घोषित शंकाराचार्य विधु शेखर भारती महास्वामी जब विगत कुछ माह पूर्व जब गोरक्षपीठ गए थे तो योगी आदित्यनाथ को मर्यादा के अनुसार उनसे काफी नीचे बैठना पड़ा । इसका कारण यह है कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सबसे ऊंचा माना जाता है
दक्षिण के जिन पूज्य शंकराचार्य जी के समक्ष यह नीचे बैठे है उन्हीं शंकराचार्य के साथ ज्योर्तिमठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जी साथ बैठेंगे हैं । इसी दक्षिण की पीठ द्वारा ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज जी का पट्टाअभिषेक किया गया है लेकिन विडंबना देखिए योगी आदित्यनाथ की हैसियत जिन मूल शंकराचार्यों के मध्य नीचे बैठे कि है वो घोषित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज जी के ऊपर धृष्टता कर , अपनी सीमा और मर्यादा का अतिक्रमण करके बोल रहे हैं। यह शंकराचार्य परंपरा और सभी शंकर मठों का अनादर ही नहीं अपितु हिंदु धर्म के प्रति किया जा रहा हिंदू द्रोह है। सनातन धर्म के सर्वोच्च गुरु, न्यायाधीश और सुप्रीम लीडर की तरह शंकराचार्य होते हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी सहित आचार्य परंपरा शासकों की शासक है तथा राजनेताओं, शासकों को गलत आचरण और कृत्यों पर डांट, फटकार सहित उन्हें दंड देने हेतु भी उत्तरदाई है। अपनी स्पष्टवादिता, सत्यता, निर्भीकता और आचार्य के सच्चे आचरणों को जीने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज को जब किसी तरह से यह दबा न करे तो यह नीचता की पराकाष्ठा को भी पार कर गए हैं। यह हिंदू धर्म के सार्वभौम जगद्गुरु है ऐसे में इनके प्रति दुराग्रह और षड्यंत्र पूर्ण तरीके से किए जा रहे सभी प्रपंच और नीचता की हद तक जाकर एक गो तस्कर, हिस्ट्रीशीटर की आड़ में झूठे मनगढ़ंत दूषित साक्ष्य से चारित्रिक प्रोपेगेंडा को बढ़ाकर उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट में पॉस्को आदि यौन शोषण के आरोप के आरोप सत्ता और व्यवस्था के उसी षड्यंत्र, द्वेषपूर्ण और तुच्छ राजनीति का हिस्सा है जिसे यह सत्ता सर्व करती आई है। चुनावों से लेकर विभिन्न समय पर विपक्षी दलों पर सत्तारूढ़ पार्टी जिस प्रकार अपने विपक्षी और प्रखर नेता को नियंत्रित ना कर पाने पर या तो सीबीआई की रेड से डराती है, समझौता ना हो तो ED की रेड द्वारा झुकाती है, ट्रस्ट के अनुदानों को रोक देती है, संगठनों पर नकेल कस देती है, साधु संतों की छवि खराब करती है जिस कारण अमुक व्यक्ति या संस्था मौन हो या समझौता कर ले अन्यथा यह सब कार्यवाही हो जाती है।
कांग्रेस सरकार के शासन में। कांची कामकोटि पीठम के 69वें आचार्य जयेंद्र सरस्वती, पर 2004 में शंकररमन हत्याकांड का आरोप लगा था, जिसमें उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप भी महिला के द्वारा लगाया गया था। इस हत्याकांड पर लंबा कानूनी संघर्ष चला। अंततः, पुडुचेरी की एक अदालत ने 2013 में पुख्ता सबूतों के अभाव में शंकराचार्य को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
ऐसे ही षड्यंत्र आज भारत की महान शंकराचार्य परंपरा को दबाने, उनकी नियंत्रित करने के लिए बीजेपी की सरकार कर रही है जिसका मुखौटा आदित्यनाथ बने है।
हिंदू धर्म के सर्वोच्च आचार्य के प्रति यह दुराग्रह योगी सहित बीजेपी को भारी पड़ेगा क्योंकि करोड़ों हिंदू आज इस प्रपंच को समझ रहे है जो सरकार उनके धर्म, गौमाता के विषय पर विरोध करने वाले शंकराचार्य जी पर कर रहीं है।
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को चाहिए कि योगी आदित्यनाथ सहित इस नीचता के स्तर पर तत्काल संज्ञान ले और क्षमा मांग ले अन्यथा महादेव और गौमाता तक क्रोध तुम्हे नहीं छोड़ेगा।
नोट: हे अहंकारी योगी आदित्यनाथ जी, अपनी औकात के अनुसार बोलिए!
सनातन धर्म को मिटाने के चक्कर में आर एस एस और आप दोनों मिट जायेंगे।
हमारे सनातन धर्म को 1200 साल में विदेशी आक्रांता नहीं मिटा सके, तो आप क्या चीज हो। भारतीय जनमानस आपको कभी माफ नहीं करेगा।
