देशभर में साइबर ठगी करने वाले अपराधियों को फर्जी फर्म और बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह का साइबर सेल आजमगढ़ और अहरौला थाना की पुलिस ने राजफाश करते हुए चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नितिन मिश्रा निवासी मखदूमपुर, थाना तहबरपुर, सुधाकर निवासी इटौरा, नवनीत सिंह निवासी शम्भूपुर पुरा गहजी और सुमित सिंह निवासी बाकरकोल सभी थाना अहरौला के रूप में हुई है।

जांच में सामने आया कि गिरोह के खिलाफ देशभर में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर कुल 448 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साइबर ठगी से संबंधित 10 लाख रुपये की धनराशि भी फ्रीज कराई है। गिरफ्तार आरोपितों में से एक भारतीय स्टेट बैंक में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मी भी शामिल है, जो खाता उपलब्ध कराता था।

अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि गिरोह के बारे में पुलिस के समन्वय पोर्टल पर सूचनाएं मिली थी, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई तो कई तथ्य निकल कर सामने आए। जांच में पता चला कि भारतीय स्टेट बैंक में फर्जी फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन के लिए किया जा रहा है।

जांच में यह भी सामने आया कि एक बैंक खाते में मात्र तीन दिनों के भीतर लगभग 40 लाख लेने देन किया गया है। गिरफ्तार आरोपित पिछले डेढ़ साल से ठगी के धंधे में है।

वहीं, गिरोह का सरगना प्रतिक चौबे अहिरौला थाना क्षेत्र के कथई गांव रहने वाला है, उसके बाद गिरोह में दूसरे नंबर का सदस्य रवि यादव लाहीडीह का रहने वाला है।

पुलिस दोनों आरोपितों के गिरफ्तारी को दबिश दे रही है। पुलिस की माने तो आरोपितों कई करोड़ की ठगी की है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों के पास से फर्जी फर्मों और उसके नाम के चालू (करंट खाता) से बड़े लेनदेन करते थे।

गिरफ्तार आरोपित के पास से पुलिस ने छह एटीएम कार्ड, कूटरचित मुहरें, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं वोटर आईडी कार्ड, ब्लैंक चेक, विदेशी सिम कार्ड, मोबाइल फोन, विभिन्न व्यक्तियों के नाम से जारी पहचान पत्र, थार वाहन सहित अन्य सामान बरामद किया है। आरोपितों को विधिक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया गया है।

ऐसे उपलब्ध कराते थे खाते

गिरोह के सदस्य लोगों को कमीशन का झांसा देकर उनके नाम पर फर्म एवं बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड तथा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपने कब्जे में लेकर प्रतिक और रवि को दे देते थे।

वे दोनों साइबर ठगी के गिरोह को ये खाते उपलब्ध करा देते थे। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को इन खातों में प्राप्त करते, निकालते एवं अन्य खातों में ट्रांसफर करते थे। बाद में इस अवैध धनराशि का गिरोह के सदस्यों के बीच बंटवारा किया जाता था।

एसबाआई का क्रेडिट कार्ड बनाता था सुमित

गिरफ्तार आरोपितों में सुमित सिंह एसबीआई का क्रेडिट कार्ड बनाता था। वह फूलपुर और सरायमीर क्षेत्र को देखता था। सुमित सिंह इससे पूर्व आजमगढ़ स्थित बैंक की मुख्य शाखा में कार्य करता था। बैंकों की सारी कमियों को अच्छी तरीके से जानता था। सुमित सबसे अधिक पढ़ा लिखा है, वह पोस्ट ग्रेजुएट है।

वहीं नवनीत, नितिन ग्रेजुएट है। जबकि सुधाकर 12वीं पास है वह बाइक बनाने वाला मिस्री है। सुमित की मदद से गिरोह फर्जी फर्मों का निर्माण कर उनके नाम पर चालू (करंट) खाता खुलवाते थे। उस चालू खाता का उपयोग बड़े पैमाने पर एवं निरंतर धनराशि के लेन-देन के लिए किया जाता था, जिससे साइबर ठगी से प्राप्त रकम को तेजी से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जा सके।

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